Muharram का महीना सिर्फ इबादत और परंपराओं तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह उन पुराने स्वादों की याद भी दिलाता है जो कभी हर घर की रसोई का हिस्सा हुआ करते थे। खासकर Muharram की रातों में बनने वाले कुछ पारंपरिक व्यंजन ऐसे थे जिनकी खुशबू पूरी गली तक महसूस होती थी। बड़े बर्तनों में धीमी आंच पर पकने वाली ये रेसिपीज़ सिर्फ खाने के लिए नहीं बल्कि लोगों को जोड़ने का माध्यम भी मानी जाती थीं।
समय के साथ फास्ट फूड और इंस्टेंट रेसिपीज़ का चलन बढ़ा, जिसकी वजह से कई पुराने पारंपरिक व्यंजन धीरे-धीरे लोगों की यादों तक सीमित होकर रह गए। आज की नई पीढ़ी शायद इन रेसिपीज़ के नाम भी नहीं जानती, जबकि कभी ये Muharram की पहचान हुआ करती थीं।
अगर आप भी पुराने दौर के स्वाद को फिर से महसूस करना चाहते हैं, तो Muharram की रातों में बनने वाली ये खास रेसिपीज़ जरूर जानिए।
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धीमी आंच पर पकने वाला खिचड़ा
पुराने समय में Muharram की रातों में बड़े देग में खिचड़ा पकाया जाता था।
गेहूं, दाल और मटन को घंटों तक धीमी आंच पर पकाकर तैयार किया जाने वाला यह व्यंजन स्वाद और मेहनत दोनों का प्रतीक माना जाता था।
क्यों था खास?
- पूरी रात धीमी आंच पर पकता था
- गाढ़ा और रिच टेक्सचर
- बड़े परिवार और मोहल्ले के लिए तैयार किया जाता था
कैलोरी जानकारी
एक सर्विंग में लगभग 500 से 700 कैलोरी होती है।
लकड़ी के चूल्हे वाली Haleem
आज ज्यादातर लोग गैस स्टोव पर Haleem बनाते हैं, लेकिन पुराने समय में इसे लकड़ी के चूल्हे पर पकाया जाता था।
लकड़ी की धीमी आंच Haleem में अलग तरह की खुशबू और स्वाद जोड़ती थी।
इसकी खासियत
- स्मोकी फ्लेवर
- ज्यादा गहरा स्वाद
- घंटों तक पकाने की परंपरा
कैलोरी जानकारी
एक सर्विंग में लगभग 550 से 750 कैलोरी होती है।
मटन यखनी शोरबा
पुराने लखनऊ और हैदराबाद के कई घरों में Muharram की रातों में हल्का मटन शोरबा भी तैयार किया जाता था।
इसे रोटी या सादे चावल के साथ परोसा जाता था।
क्यों पसंद किया जाता था?
- हल्का लेकिन स्वादिष्ट
- रात के भोजन के लिए उपयुक्त
- कम मसालों वाला पारंपरिक स्वाद
कैलोरी जानकारी
एक सर्विंग में लगभग 250 से 400 कैलोरी होती है।
गुड़ वाला मीठा दलिया
आजकल चीनी से बनने वाली मिठाइयां ज्यादा लोकप्रिय हैं, लेकिन पुराने समय में कई घरों में गुड़ वाला मीठा दलिया बनाया जाता था।
इसकी खासियत
- देसी स्वाद
- हल्की मिठास
- पौष्टिक और पेट भरने वाला
कैलोरी जानकारी
एक सर्विंग में लगभग 220 से 320 कैलोरी होती है।
देसी घी वाली मीठी सेवइयां
Muharram की रातों में कुछ घरों में देसी घी और दूध से बनी मीठी सेवइयां भी तैयार की जाती थीं।
इनमें इलायची और सूखे मेवे डालकर स्वाद को और खास बनाया जाता था।
क्यों थीं अलग?
- घी की खुशबू
- घर जैसा पारंपरिक स्वाद
- मेहमानों की पसंदीदा मिठाई
कैलोरी जानकारी
एक सर्विंग में लगभग 280 से 380 कैलोरी होती है।
मिट्टी के बर्तन में बनने वाला मीठा चावल
कई पुराने परिवारों में मीठा चावल मिट्टी के बर्तन में पकाया जाता था।
इससे चावल में हल्की मिट्टी की खुशबू आ जाती थी जो स्वाद को और खास बना देती थी।
इसकी खासियत
- पारंपरिक तरीका
- अलग खुशबू और स्वाद
- बड़ी मात्रा में आसानी से तैयार
कैलोरी जानकारी
एक सर्विंग में लगभग 280 से 420 कैलोरी होती है।
क्यों गायब हो रही हैं ये पुरानी रेसिपीज़?
आज की तेज जिंदगी में लोगों के पास घंटों तक धीमी आंच पर खाना पकाने का समय कम होता जा रहा है।
कुछ बड़े कारण
- इंस्टेंट फूड का बढ़ता चलन
- पारंपरिक रेसिपीज़ सीखने वालों की कमी
- लकड़ी के चूल्हे और बड़े बर्तनों का कम उपयोग
- फास्ट फूड की लोकप्रियता
इसी वजह से कई पुराने स्वाद अब धीरे-धीरे गायब होते जा रहे हैं।
पुराने स्वाद को फिर से कैसे जिंदा रखें?
परिवार की पुरानी रेसिपीज़ सीखें
दादी-नानी की रेसिपीज़ को लिखकर रखें।
धीमी आंच पर पकाने की आदत डालें
यही पारंपरिक स्वाद का सबसे बड़ा राज है।
बच्चों को पारंपरिक भोजन से परिचित कराएं
नई पीढ़ी को पुराने स्वादों के बारे में बताना जरूरी है।
घर में त्योहारों पर पारंपरिक व्यंजन बनाएं
इससे पुरानी परंपराएं जिंदा रहती हैं।

Muharram की रातों का असली स्वाद
Muharram की रातों में बनने वाले ये पारंपरिक व्यंजन सिर्फ खाने की चीजें नहीं थे। इनके साथ परिवार, पड़ोस और साझा करने की भावना भी जुड़ी होती थी। बड़े देग में पकता खिचड़ा, लकड़ी के चूल्हे की खुशबू वाली Haleem और घी से महकती सेवइयां लोगों को एक साथ बैठकर खाने का मौका देती थीं।
आज भले ही समय बदल गया हो, लेकिन इन पुराने स्वादों की याद आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। अगर आप इस Muharram कुछ अलग और पारंपरिक बनाना चाहते हैं, तो इन भूली-बिसरी रेसिपीज़ को जरूर ट्राई करें। हो सकता है इनके स्वाद में आपको अपने बचपन और पुराने दिनों की झलक मिल जाए।

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