लखनऊ का नाम आते ही सबसे पहले तहज़ीब, नवाबी अंदाज़ और लज़ीज़ खाने की याद आती है। सदियों पुराना यह शहर सिर्फ अपनी संस्कृति के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अनोखी खानपान परंपराओं के लिए भी पूरी दुनिया में जाना जाता है। Muharram के दौरान पुराने लखनऊ की गलियों में एक अलग ही माहौल देखने को मिलता है, जहां इबादत, परंपरा और खास व्यंजनों की खुशबू एक साथ महसूस होती है।
पुराने समय में Muharram के दिनों में कई ऐसे पारंपरिक पकवान बनाए जाते थे जो आज भी लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। इन व्यंजनों की खास बात यह है कि इनमें सिर्फ स्वाद ही नहीं बल्कि इतिहास और सांस्कृतिक विरासत भी शामिल है। बड़े डिशों में पकने वाले खिचड़े से लेकर सुगंधित यखनी तक, हर डिश की अपनी एक अलग पहचान है।
अगर आप भी जानना चाहते हैं कि Muharram के दौरान पुराने लखनऊ में कौन-कौन से मशहूर व्यंजन बनाए जाते हैं, तो यह लेख आपके लिए है।
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खिचड़ा – लखनऊ की सबसे पहचान वाली डिश
Muharram और खिचड़ा का रिश्ता काफी पुराना माना जाता है। पुराने लखनऊ में यह व्यंजन बड़े पैमाने पर तैयार किया जाता था और आज भी कई घरों में इसकी परंपरा जारी है।
गेहूं, दाल और मटन को घंटों धीमी आंच पर पकाकर तैयार किया जाने वाला खिचड़ा स्वाद और पोषण दोनों से भरपूर होता है।
खिचड़ा क्यों है खास?
- धीमी आंच पर पकता है
- गाढ़ा और रिच टेक्सचर
- लंबे समय तक पेट भरा रखता है
- तबर्रुक के रूप में भी बांटा जाता है
कैलोरी जानकारी
एक सर्विंग में लगभग 500 से 700 कैलोरी होती है।
लखनवी यखनी
पुराने लखनऊ की रसोई में यखनी का विशेष स्थान रहा है। यह हल्के मसालों और मटन के शोरबे से तैयार की जाने वाली पारंपरिक डिश है।
इसकी खासियत
- हल्का और सुगंधित स्वाद
- कम मसाले
- पौष्टिक और आसानी से पचने वाला
यखनी को अक्सर सादे चावल या रोटी के साथ परोसा जाता है।
कैलोरी जानकारी
एक सर्विंग में लगभग 250 से 400 कैलोरी होती है।
मीठा दलिया
Muharram के दौरान मीठा दलिया भी कई परिवारों में बनाया जाता है।
दूध, घी और सूखे मेवों से तैयार होने वाला यह व्यंजन सादगी और स्वाद का बेहतरीन उदाहरण माना जाता है।
क्यों पसंद किया जाता है?
- जल्दी बन जाता है
- बच्चों और बुजुर्गों दोनों को पसंद
- हल्का और पौष्टिक
कैलोरी जानकारी
एक सर्विंग में लगभग 220 से 320 कैलोरी होती है।
शीर खुरमा
हालांकि शीर खुरमा को अक्सर ईद से जोड़ा जाता है, लेकिन पुराने लखनऊ के कई परिवार विशेष मौकों पर इसे बनाना पसंद करते हैं।
दूध, सेवई, खजूर और ड्राई फ्रूट्स से तैयार यह मिठाई बेहद रिच और स्वादिष्ट होती है।
इसकी खासियत
- शाही स्वाद
- क्रीमी टेक्सचर
- मेहमानों की पसंदीदा मिठाई
कैलोरी जानकारी
एक सर्विंग में लगभग 300 से 450 कैलोरी होती है।
लखनवी कबाब
पुराने लखनऊ की पहचान उसके कबाबों के बिना अधूरी मानी जाती है। Muharram के दौरान कई घरों में खास अवसरों पर नरम और सुगंधित कबाब भी तैयार किए जाते हैं।
क्यों मशहूर हैं?
- मुंह में घुल जाने वाला टेक्सचर
- खास मसालों का मिश्रण
- नवाबी रसोई की पहचान
कैलोरी जानकारी
एक सर्विंग में लगभग 250 से 450 कैलोरी होती है।
रूमाली रोटी और शोरबा
पुराने लखनऊ में हल्के शोरबे और रूमाली रोटी का भी विशेष महत्व रहा है।
मसालों से भरपूर लेकिन संतुलित स्वाद वाला शोरबा कई पारंपरिक व्यंजनों के साथ परोसा जाता था।
इसकी खासियत
- हल्का लेकिन स्वादिष्ट
- सुगंधित मसाले
- हर उम्र के लोगों को पसंद
कैलोरी जानकारी
एक सर्विंग में लगभग 180 से 350 कैलोरी होती है।
पुराने लखनऊ के स्वाद की सबसे बड़ी पहचान
पुराने लखनऊ के व्यंजनों की सबसे बड़ी खासियत उनका पकाने का तरीका है। यहां के रसोइये स्वाद को बढ़ाने के लिए हमेशा धीमी आंच और ताजे मसालों का इस्तेमाल करते थे।
कुछ खास बातें
- देसी घी का उपयोग
- घंटों तक पकाने की परंपरा
- मसालों का संतुलित इस्तेमाल
- खुशबू और स्वाद पर विशेष ध्यान
यही कारण है कि आज भी पुराने लखनऊ के व्यंजनों का स्वाद लोगों को अपनी ओर खींचता है।

क्यों आज भी लोकप्रिय हैं ये पारंपरिक व्यंजन?
समय बदल गया, खाने के तरीके बदल गए और आधुनिक रेसिपीज़ ने भी जगह बना ली। लेकिन पुराने लखनऊ के पारंपरिक व्यंजनों का आकर्षण आज भी कम नहीं हुआ है। इन व्यंजनों में सिर्फ स्वाद नहीं बल्कि इतिहास, संस्कृति और परिवार की यादें भी शामिल होती हैं।
जब बड़े देग में खिचड़ा पकता है, यखनी की खुशबू उठती है और मीठे दलिये की मिठास घर में फैलती है, तो पुराने दिनों की यादें ताजा हो जाती हैं। यही वजह है कि Muharram के दौरान ये पारंपरिक व्यंजन आज भी लोगों के दिलों में खास जगह रखते हैं।
अगर आप इस बार Muharram पर कुछ पारंपरिक और यादगार बनाना चाहते हैं, तो पुराने लखनऊ के इन मशहूर व्यंजनों को जरूर ट्राई करें। इनका स्वाद आपको नवाबी दौर की रसोई की एक खूबसूरत झलक जरूर देगा।

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